Saturday, 19 October 2013

Arnica Montana{अर्निका मोंटाना }

             इस औषध की क्रिया रक्त,मांस-पेशी और कोशिका के ऊपर होती हैं |चोट लगने ,कुचल जाने अथवा घाव हों जाने पर जैसा दर्द होता हैं ,वैसे ही दर्द का अनुभव सारे शरीर में होना ,जिस शैया पर शयन किया जाय उसका कठोर प्रतीत होना ,मस्तिष्क में जलन होना ,आधे सिर में दर्द होना तथा चेहरे का गर्म होना ,शरीर के अन्य भागो विशेषकर हाथ पावों  का ठंढा होना |शरीर पर काले रंग का दाग पडना ,डकारे आना,जीभ से अथवा मल से सड़े-अंडे जैसी दुर्गन्ध आना ,चोट आदि के कारण रक्त-श्राव ,मूर्छा अथवा मोह की अवस्था ,ज्वर के कारण छटपटाना ,शरीर में सडन,चोट लगने अथवा शारीरिक श्रम के कारण उत्पन्न होने वाले रोग ,प्रसव के बाद पक्षाघात हों जाना ,पेशी शूल ,सन्निपातिक ज्वर ,गिरने के कारण होने वाला धनुष्तान्कार रोग ,वात रोग,जीर्ण-मलेरिया रोग ,नाक व् मुख से रक्त श्राव होना ,शय्या-क्षत ,अनजाने में पेशाब निकल जाना आदि लक्षणों में यह औषधि उपयोगी हैं |
                       चोट लग जाना ,त्वचा छिल जाना ,शरीर में काले दाग  पड़ जाना ,गिरने के कारण लगने वाली चोट में इसे "बाह्य प्रयोग की औषधि"के रूप में व्यवहृत कियाजाता हैं | 
                    {सौजन्य से -होम्योपैथी मैटेरिका मेडिका की अनेको पुस्तके }
हिंदी लेखन -इस ब्लॉग के लेखक द्वारा |

सम के द्वारा सम की चिकित्सा |

होमियोपैथी का सिद्धांत हैं-'सम के द्वारा सम की चिकित्सा'|एलोपैथी आदि नामो से प्रचलित चिकित्सा विधियाँ विपरीत-विधान वाली हैं |
        होम्योपैथी के आविष्कारक महात्मा क्रिश्चियन फ्रेडरिक सेम्युअल हैनिमन का जन्म ११ अप्रैल १७५५ ईश्वी कों जर्मन देश के अंतर्गत "सैक्सन" प्रान्त के 'मायिसेन'    नामक नगर में हुआ था |उनकी मृत्यु २ जुलाई १८४३ ईश्वी कों फ़्रांस के पेरिस नगर में हुयी |
          हैनिमैन प्रारम्भ में एलोपैथिक चिकित्सक थे ,जिससे वे कभी संतुष्ट नही हों सके थे ,क्यूंकि विपरीत-विधान  अर्थात एलोपैथी -चिकित्सा से रोगों का शमन तो हों सकता था किन्तु बाद में उसका दुष्प्रभाव अन्य रोगों के रूप में होता था |एक बार अंग्रेजी एलोपैथिक मैटेरिया मेडिका का जर्म भाषा में अनुवाद करते समय उन्होंने पढ़ा की 'सिनकोना' नामक औषध ठंढ लगकर आने वाले बुखार कों दूर करती हैं ,साथ ही यदि स्वस्थ व्यक्ति सिनकोना खा ले तो उसे ठण्ड लगकर बुखार आने लगता हैं |
      'सिनकोना' के इस गुण का परीक्षण उन्होंने खुद के ऊपर किया |तत्पश्चात उन्होंने अन्य औषधियों  का भी इसी दृष्टि से परीक्षण किया और 'समः समं शमयति'अर्थात सामान के द्वारा सामान की चिकित्सा कों प्रमाणित कर दिखाया|