होमियोपैथी का सिद्धांत हैं-'सम के द्वारा सम की चिकित्सा'|एलोपैथी आदि नामो से प्रचलित चिकित्सा विधियाँ विपरीत-विधान वाली हैं |
होम्योपैथी के आविष्कारक महात्मा क्रिश्चियन फ्रेडरिक सेम्युअल हैनिमन का जन्म ११ अप्रैल १७५५ ईश्वी कों जर्मन देश के अंतर्गत "सैक्सन" प्रान्त के 'मायिसेन' नामक नगर में हुआ था |उनकी मृत्यु २ जुलाई १८४३ ईश्वी कों फ़्रांस के पेरिस नगर में हुयी |
हैनिमैन प्रारम्भ में एलोपैथिक चिकित्सक थे ,जिससे वे कभी संतुष्ट नही हों सके थे ,क्यूंकि विपरीत-विधान अर्थात एलोपैथी -चिकित्सा से रोगों का शमन तो हों सकता था किन्तु बाद में उसका दुष्प्रभाव अन्य रोगों के रूप में होता था |एक बार अंग्रेजी एलोपैथिक मैटेरिया मेडिका का जर्म भाषा में अनुवाद करते समय उन्होंने पढ़ा की 'सिनकोना' नामक औषध ठंढ लगकर आने वाले बुखार कों दूर करती हैं ,साथ ही यदि स्वस्थ व्यक्ति सिनकोना खा ले तो उसे ठण्ड लगकर बुखार आने लगता हैं |
'सिनकोना' के इस गुण का परीक्षण उन्होंने खुद के ऊपर किया |तत्पश्चात उन्होंने अन्य औषधियों का भी इसी दृष्टि से परीक्षण किया और 'समः समं शमयति'अर्थात सामान के द्वारा सामान की चिकित्सा कों प्रमाणित कर दिखाया|
होम्योपैथी के आविष्कारक महात्मा क्रिश्चियन फ्रेडरिक सेम्युअल हैनिमन का जन्म ११ अप्रैल १७५५ ईश्वी कों जर्मन देश के अंतर्गत "सैक्सन" प्रान्त के 'मायिसेन' नामक नगर में हुआ था |उनकी मृत्यु २ जुलाई १८४३ ईश्वी कों फ़्रांस के पेरिस नगर में हुयी |
हैनिमैन प्रारम्भ में एलोपैथिक चिकित्सक थे ,जिससे वे कभी संतुष्ट नही हों सके थे ,क्यूंकि विपरीत-विधान अर्थात एलोपैथी -चिकित्सा से रोगों का शमन तो हों सकता था किन्तु बाद में उसका दुष्प्रभाव अन्य रोगों के रूप में होता था |एक बार अंग्रेजी एलोपैथिक मैटेरिया मेडिका का जर्म भाषा में अनुवाद करते समय उन्होंने पढ़ा की 'सिनकोना' नामक औषध ठंढ लगकर आने वाले बुखार कों दूर करती हैं ,साथ ही यदि स्वस्थ व्यक्ति सिनकोना खा ले तो उसे ठण्ड लगकर बुखार आने लगता हैं |
'सिनकोना' के इस गुण का परीक्षण उन्होंने खुद के ऊपर किया |तत्पश्चात उन्होंने अन्य औषधियों का भी इसी दृष्टि से परीक्षण किया और 'समः समं शमयति'अर्थात सामान के द्वारा सामान की चिकित्सा कों प्रमाणित कर दिखाया|
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